गोरखपुर|जन प्रहरी न्यूज़
अब झूठे मुकदमे दर्ज कराकर दूसरों को फंसाने की कोशिश करने वालों को खुद कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। पुलिस विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी मामले में जांच के दौरान आरोप झूठे पाए जाते हैं, तो शिकायतकर्ता और झूठी गवाही देने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पुलिस के निर्देशानुसार, हर ऐसे मामले का अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें झूठी एफआईआर से जुड़े मामलों को दर्ज कर उनकी नियमित समीक्षा की जाएगी। थाना स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक इन मामलों की निगरानी की जाएगी और रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी।
यदि अदालत के आदेश (धारा 156(3) सीआरपीसी) के तहत दर्ज एफआईआर भी जांच में गलत पाई जाती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता व गवाहों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वहीं, केवल साक्ष्य के अभाव में बंद हुए मामलों में बिना ठोस प्रमाण के कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, ताकि वास्तविक पीड़ितों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
पुलिस का कहना है कि इस सख्ती का उद्देश्य झूठे मुकदमों पर रोक लगाना और न्याय व्यवस्था को मजबूत करना है।
