जन प्रहरी न्यूज़
महराजगंज। जनपद के लक्ष्मीपुर क्षेत्र में वर्ष 1924 में ब्रिटिश काल में स्थापित एशिया की शुरुआती परियोजनाओं में शामिल मानी जाने वाली ऐतिहासिक “कोयले वाली ट्रेन” के दो पुराने इंजन 23 फरवरी को रेल प्रशासन द्वारा लखनऊ भेज दिए गए। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मायूसी और आक्रोश का माहौल देखने को मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह ट्रेन महराजगंज की ऐतिहासिक पहचान और गौरव का प्रतीक थी। इसे संरक्षित कर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता था, जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलती। लेकिन बिना व्यापक जनचर्चा के इसे लखनऊ भेजे जाने से लोगों में नाराजगी है।
नौतनवा विधानसभा क्षेत्र के किसान नेता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नागेंद्र प्रसाद शुक्ला ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण जिले की ऐतिहासिक धरोहर बाहर चली गई। उन्होंने 23 फरवरी को लक्ष्मीपुर के इतिहास के लिए “काला दिन” करार दिया।
धरोहर हटाए जाने के बाद जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। आमजन का मानना है कि यदि समय रहते पहल की जाती तो इस विरासत को यहीं संरक्षित रखा जा सकता था।
गौरतलब है कि यह “कोयले वाली ट्रेन” दशकों से क्षेत्र की पहचान बनी हुई थी और नई पीढ़ी के लिए इतिहास से जुड़ने का एक माध्यम भी थी। इसके हटने से लोगों में भावनात्मक जुड़ाव भी आहत हुआ है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या भविष्य में जिले की अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
